वामन द्वादशी पर पूजा कैसे करें?
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वामन द्वादशी: भाद्रपद शुक्ल 12। वामन अवतार = बलि से तीन पग दान। विधि: वामन प्रतिमा → षोडशोपचार → 'ॐ नमो भगवते वामनाय' → कथा पाठ → छत्र (छाता) दान विशेष → ब्राह्मण बालक पूजन-भोज। दान = बलि की महिमा।
- 1प्रातः स्नान-संकल्प: 'भाद्रपद शुक्ल द्वादश्यां वामनदेव पूजनं करिष्ये।'
- 2वामन प्रतिमा स्थापना: भगवान वामन (छोटे ब्राह्मण बालक, छत्र-दण्ड सहित) की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- 3षोडशोपचार पूजन: पंचामृत अभिषेक, पीतांबर (पीले वस्त्र), चन्दन, तुलसी, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य।
- 4मंत्र: 'ॐ नमो भगवते वामनाय।' 'ॐ त्रिविक्रमाय नमः।'
- 5कथा पाठ: भागवत पुराण अष्टम स्कन्ध से वामन अवतार कथा — बलि से तीन पग दान, त्रिविक्रम रूप।
- 6छत्र दान (विशेष): वामन भगवान ने छत्र (छाता) धारण किया था। इस दिन छत्र (छाता) दान विशेष पुण्यदायी। जूते-चप्पल दान भी शुभ (वामन ने नंगे पैर चलकर बलि के यज्ञ में गए थे)।
- 7ब्राह्मण भोज-दान: ब्राह्मणों को भोजन, दक्षिणा, वस्त्र दान। ब्राह्मण बालक की विशेष पूजा (वामन ब्राह्मण बालक थे)।
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