वास्तु पूजा और भूमि पूजन कैसे करें?
की चेकलिस्ट
भूमि पूजन: शुभ मुहूर्त → भूमि शुद्धि → गणेश पूजन → भूमि देवी पूजन → वास्तु पुरुष पूजन → नवग्रह → दिग्पाल पूजन → ईशान कोण से खात (नींव) → नवरत्न-पंचधातु स्थापन → हवन → दान। वास्तु पूजा गृह प्रवेश से पहले।
- 1शुभ मुहूर्त: ज्योतिषी से निर्माण हेतु शुभ मुहूर्त (अभिजित, अमृत सिद्धि योग आदि) निर्धारित करवाएँ।
- 2भूमि शुद्धि: निर्माण स्थल को साफ करें। गंगाजल और गोमूत्र से शुद्धि करें।
- 3गणेश पूजन: सबसे पहले श्री गणेश का पूजन।
- 4भूमि देवी पूजन: भूमि देवी (पृथ्वी माता) का आह्वान — 'ॐ भूम्यै नमः'। हल्दी, कुमकुम, अक्षत, पुष्प अर्पित करें।
- 5वास्तु पुरुष पूजन: वास्तु पुरुष (81 पद वास्तु यंत्र) का पूजन।
- 6नवग्रह पूजन: नवग्रहों का शांति पूजन।
- 7दिग्पाल पूजन: आठ दिशाओं के अधिपतियों (इन्द्र, अग्नि, यम, निऋति, वरुण, वायु, कुबेर, ईशान) का पूजन।
- 8खात पूजन (नींव खुदाई): ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) से नींव खोदना शुभ माना जाता है। पहली खुदाई यजमान स्वयं करे।
- 9नींव में स्थापना: नींव में नवरत्न, पंचधातु, नवग्रह यंत्र, शालिग्राम, सुपारी, हल्दी गाँठ आदि रखे जाते हैं।
- 10हवन: वास्तु शांति हवन — घी, तिल, जौ, सप्तधान्य की आहुतियाँ।
- 11ब्राह्मण भोज और दान: पूजा के बाद ब्राह्मण भोजन और दक्षिणा।
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