विस्तृत उत्तर
वास्तु पूजा और भूमि पूजन नया निर्माण कार्य प्रारम्भ करने से पहले किया जाने वाला शुभ अनुष्ठान है।
भूमि पूजन (भूमिपूजा)
यह निर्माण आरम्भ से पहले भूमि देवी की अनुमति और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
भूमि पूजन विधि
- 1शुभ मुहूर्त: ज्योतिषी से निर्माण हेतु शुभ मुहूर्त (अभिजित, अमृत सिद्धि योग आदि) निर्धारित करवाएँ।
- 1भूमि शुद्धि: निर्माण स्थल को साफ करें। गंगाजल और गोमूत्र से शुद्धि करें।
- 1गणेश पूजन: सबसे पहले श्री गणेश का पूजन।
- 1भूमि देवी पूजन: भूमि देवी (पृथ्वी माता) का आह्वान — 'ॐ भूम्यै नमः'। हल्दी, कुमकुम, अक्षत, पुष्प अर्पित करें।
- 1वास्तु पुरुष पूजन: वास्तु पुरुष (81 पद वास्तु यंत्र) का पूजन।
- 1नवग्रह पूजन: नवग्रहों का शांति पूजन।
- 1दिग्पाल पूजन: आठ दिशाओं के अधिपतियों (इन्द्र, अग्नि, यम, निऋति, वरुण, वायु, कुबेर, ईशान) का पूजन।
- 1खात पूजन (नींव खुदाई): ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) से नींव खोदना शुभ माना जाता है। पहली खुदाई यजमान स्वयं करे।
- 1नींव में स्थापना: नींव में नवरत्न, पंचधातु, नवग्रह यंत्र, शालिग्राम, सुपारी, हल्दी गाँठ आदि रखे जाते हैं।
- 1हवन: वास्तु शांति हवन — घी, तिल, जौ, सप्तधान्य की आहुतियाँ।
- 1ब्राह्मण भोज और दान: पूजा के बाद ब्राह्मण भोजन और दक्षिणा।
वास्तु पूजा (गृह निर्माण पूर्ण होने पर)
निर्माण पूर्ण होने और गृह प्रवेश से पहले वास्तु पूजा की जाती है। इसमें वास्तु पुरुष, नवग्रह, पंचदेव पूजन और शांति हवन प्रमुख हैं।
सामग्री: कलश, नारियल, सुपारी, पंचामृत, गंगाजल, हवन कुण्ड, पंचरत्न/नवरत्न, शालिग्राम, पंचधातु, हल्दी, कुमकुम, फल-फूल-नैवेद्य आदि।





