वास्तु के मूल सिद्धांत — सूर्य प्रकाश, वायु संचार, जल प्रवाह — वैज्ञानिक रूप से तर्कसंगत हैं। ये प्राचीन पर्यावरणीय ज्ञान पर आधारित हैं। परंतु यंत्र, पिरामिड, ऊर्जा शोषण जैसे आधुनिक वास्तु दावे वैज्ञानिक प्रमाणों से रहित हैं।
1सूर्य प्रकाश और दिशा — पूर्व दिशा में खिड़कियां और द्वार रखने का नियम सीधे सूर्य प्रकाश (Vitamin D, circadian rhythm) से जुड़ा है। प्रातःकालीन सूर्य प्रकाश स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है — यह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है।
2वायु संचार (Cross Ventilation) — उत्तर-पूर्व में खुला स्थान और दक्षिण-पश्चिम में ऊंचा निर्माण — यह भारत में प्रचलित हवा के प्रवाह (उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम) के अनुरूप है।
3जल प्रवाह — ईशान कोण में जल स्रोत — भारतीय उपमहाद्वीप में भूमि की प्राकृतिक ढलान उत्तर-पूर्व की ओर है, अतः जल स्रोत यहां तार्किक है।
4चुंबकीय क्षेत्र और शयन दिशा — उत्तर में सिर करके न सोने का नियम पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से जुड़ा बताया जाता है, यद्यपि इस पर निर्णायक वैज्ञानिक शोध सीमित है।
5रसोई आग्नेय कोण में — दक्षिण-पूर्व में रसोई — इससे सुबह का सूर्य प्रकाश रसोई को कीटाणुमुक्त करता है और पकाने के धुएं की निकासी प्राकृतिक वायु प्रवाह से होती है।
6केंद्र (ब्रह्म स्थान) खुला — घर का केंद्र खुला और हल्का रखना — आधुनिक वास्तुकला में भी केंद्रीय आंगन (courtyard) प्रकाश और वायु संचार के लिए उत्तम माना जाता है।