वेदों में धर्म का अर्थ क्या है?
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वेदों में धर्म का मूल रूप 'ऋत' है — ब्रह्मांडीय सत्य-व्यवस्था जिसे वरुण देव संरक्षित करते हैं। 'धारयति इति धर्मः' — जो धारण करे, वह धर्म। मनुस्मृति (2/6) — 'वेदोऽखिलो धर्ममूलम्' — सम्पूर्ण वेद ही धर्म का मूल है।
- 1सार्वभौमिक धर्म: सूर्योदय, नदियों का प्रवाह, ऋतु-क्रम — सब ऋत है। इसका पालन करना धर्म, उल्लंघन अधर्म।
- 2यज्ञिक धर्म: यज्ञ करना, देवताओं को हविष्य देना, प्रकृति का सम्मान।
- 3नैतिक धर्म: ऋग्वेद (1/22/18) में — सत्यवादिता, अहिंसा, दान, अतिथि-सत्कार।
- 4वर्णधर्म: पुरुषसूक्त में चार वर्णों के स्वधर्म का उल्लेख।
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वेद ज्ञान
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