नए घर में प्रवेश के शुभ दिन — वैदिक पंचांग अनुसार
खरमास — गृहप्रवेश मुहूर्त नहीं है।
चातुर्मास प्रारंभ — गृहप्रवेश वर्जित।
चातुर्मास — गृहप्रवेश वर्जित।
चातुर्मास / पितृ पक्ष — गृहप्रवेश वर्जित।
चातुर्मास — देवउठनी एकादशी के बाद ही गृहप्रवेश।
ये नक्षत्र गृहप्रवेश के लिए सर्वाधिक शुभ माने जाते हैं। इन नक्षत्रों में नए घर में प्रवेश करने से सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है।
सबसे पहले गणेश जी और वास्तु देवता की पूजा करें। नवग्रह पूजन और हवन भी किया जाता है। कलश स्थापना अनिवार्य है।
गृहलक्ष्मी (पत्नी) दाहिने पैर से सबसे पहले घर में प्रवेश करें। द्वार पर स्वस्तिक, मंगल कलश और बंदनवार लगाएँ।
चूल्हे पर दूध उबालकर उफनने दें — यह समृद्धि का प्रतीक है। आँगन में तुलसी का पौधा अवश्य लगाएँ।
गृहप्रवेश के दिन गोमाता की सेवा और ब्राह्मण भोजन कराना अत्यंत शुभ है। दान-पुण्य से गृह में सकारात्मक ऊर्जा आती है।