शादी के शुभ दिन, तिथि और नक्षत्र — वैदिक पंचांग अनुसार
खरमास (पौष) — इस माह विवाह मुहूर्त नहीं है।
चातुर्मास प्रारंभ — जुलाई से अक्टूबर तक विवाह वर्जित।
चातुर्मास — विवाह वर्जित।
चातुर्मास / पितृ पक्ष — विवाह वर्जित।
चातुर्मास समाप्ति — देवउठनी एकादशी (29 अक्टूबर) के बाद।
ये नक्षत्र विवाह के लिए सर्वाधिक शुभ माने जाते हैं। इनमें की गई शादी दम्पत्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य लाती है।
विवाह मुहूर्त के लिए तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — पाँचों अंगों को देखा जाता है। शुक्ल पक्ष की तिथियाँ (द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी) शुभ मानी जाती हैं।
वर-वधू की कुंडली में गुण मिलान (अष्टकूट) किया जाता है। 36 में से न्यूनतम 18 गुण मिलने आवश्यक हैं। मांगलिक दोष, नाड़ी दोष और भकूट दोष का विशेष ध्यान रखा जाता है।
आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी) से कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी) तक भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं। इस अवधि (लगभग जुलाई-अक्टूबर) में विवाह वर्जित है।