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जलयात्राविधान

जलयात्राविधान विधि - कर्मकांड भास्कर

मूल स्रोत: पृष्ठ 110–111

जलयात्राविधान

॥ जलयात्राविधान ॥ सूत्र संकेत- जल यात्रा युग निर्माण योजना के यज्ञाभियान की एक बहुत प्रभावशाली और उपयोगी प्रक्रिया रही है । यदि जल यात्रा की व्यवस्था ठीक ढंग से की जाए तो उससे अनेक प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष लाभ होते हैं । जैसे- * जनता को होने वाले आयोजन की भव्यता और विशालता आदि विशेषताओं की झलक मिलना । * जन स्तर पर खुला निमन्त्रण तथा आयोजन में सम्मिलित होने के उत्साह का संचार । * भावनासिक्त मातृ-शक्तियों द्वारा देवपूजन सहित मंगल कलश स्थापित करके आयोजन का सुसंस्कार भरा उद्घाटन । नारी शक्ति के जागरण, विकास और उपयोगिता की दिशा में महत्त्वपूर्ण चरण । * धर्मघट घर-घर स्थापित कराये जाने की सरस सशक्त पृष्ठभूमि का निर्माण । इन सब लाभों को ध्यान में रखते हुए जलयात्रा यज्ञों के अतिरिक्त नवरात्रि साधना, प्रज्ञापुराण कथा आयोजनों जैसे अन्य कार्यक्रमों के साथ भी जोड़ी जा सकती है; किन्तु समय, परिस्थिति एवं सामर्थ्य देखकर ही उसके बारे में निर्णय करना चाहिए । मात्र पूजा और फीके प्रदर्शन से बचना ही ठीक है । व्यवस्था और भव्यता न बन सके, तो कलश स्थापना को सामान्य रीति से यज्ञशाला या आयोजन स्थल पर ही कर लेना ठीक है । जलयात्रा हेतु आवश्यक निर्देश- * पर्याप्त मात्रा में मिट्टी के कलश एवं ईडली सुन्दर ढंग से रँगकर समय पर तैयार हों । * उत्साही महिलाएँ घर-घर जाकर जलयात्रा में सम्मिलित होने के लिए बहनों में उत्साह पैदा करें । यज्ञ का महत्त्व उसका उद्घाटन करने का श्रेय बताना, प्राप्त होने वाले पुण्य एवं सौभाग्य का बोध कराना आदि ऐसे

ढंग हैं, जिससे इच्छित संख्या में नारियों का भावभरा सहयोग प्राप्त किया जा सकता है । * जुलूस को भव्य बनाने के लिए बैंड, कीर्तन- मण्डलियों, बैनर, पोस्टर झाँकियों आदि की व्यवस्था स्थिति एवं सामर्थ्य के अनुसार की जाए । * शिक्षित, सधे हुए स्वयंसेवकों को जुलूस व्यवस्था के लिए तैयार किया जाए, ताकि महिलाओं की सुरक्षा तथा जुलूस का अनुशासन बनाने में कठिनाई न हो । * जलयात्रा का मार्ग नगर के महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों से होकर हो ; किन्तु इतना लम्बा न हो कि शामिल होने वाली महिलाएँ उस मार्ग को पूरा करने का श्रम सहन न कर सकें । * जलयात्रा जहाँ समाप्त हो, वहीं घट लाने वाली महिलाओं को प्रसाद देकर सम्मानित करने की व्यवस्था करनी चाहिए । क्रम व्यवस्था- जलयात्रा का मुख्य कर्मकाण्ड जलाशय पर किया जाता है । कर्मकाण्ड का क्रम नीचे दिया जा रहा है, उसमें मन्त्र सामान्य प्रकरण से देख लेने चाहिए । क्रम इस प्रकार है- (१) पवित्रीकरण- अपवित्र........ मन्त्र से स्थिति के अनुसार महिलाएँ स्वयं अपने ऊपर जल छिड़क लें अथवा स्वयंसेवक कुश या पल्लवों से सिंचन करें । (२) पृथ्वी पूजन- पृथ्वि त्वया... मन्त्र बोलकर हाथ से भूमि स्पर्श के साथ नमस्कार कराएँ । (३) सर्वदेव नमस्कार (४) स्वस्तिवाचन (५) कलावा एवं तिलक (६) वरुणदेवता का आवाहन वरुणस्योत्तम्भनमसि.... मन्त्र से कराया जाए, अक्षत-पुष्प से पूजन कराकर नमस्कार कराएँ । (७) वही मन्त्र दुहराते हुए कलशों में जल भरा जाए । (८) कलश वन्दना- कलशस्य मुखे विष्णुः ... मन्त्र से की जाए । उसी के साथ सभी महिलाएँ अपने-अपने कलश के कण्ठ में कलावा बाँधें और नमस्कार करें । (९) कलशों को सिर पर रखकर जुलूस का स्वरूप बनाकर चल पड़ें । (१०) आयोजन स्थल पर पहुँचकर केवल कलशधारी महिलाओं को “भद्रं कर्णेभिः ....” मन्त्र से अक्षत वर्षा के साथ अन्दर प्रवेश कराएँ, गायत्री मन्त्र बोलते हुए यथास्थान रखवाएँ । (११) तत्पश्चात्‌ आरती एवं महिलाओं का शान्ति अभिषेक द्यौः शान्ति... से करके मंगल मन्त्र बोलते हुए प्रसाद दिया जाए ।