तंत्र शास्त्रतंत्र में अभिमंत्रित वस्तु कैसे बनाएं?विधि: शुद्धि (गंगाजल) → संकल्प → वस्तु स्पर्श + मंत्र 108 बार → प्राण वायु (फूंक) → पवित्र स्थान। क्या: जल, माला, यंत्र, रुद्राक्ष, रत्न। सिद्ध गुरु = सर्वाधिक प्रभावी। भक्ति भाव से सभी कर सकते।#अभिमंत्रित#वस्तु#मंत्र शक्ति
पूर्णाहुति और समापनहवन की भस्म कहाँ-कहाँ लगाते हैं?हवन की भस्म: मंत्र 'ॐ त्र्यायुषं जमदग्नेः...' से अभिमंत्रित करके ललाट (माथा), ग्रीवा (कंठ), दक्षिण बाहुमूल (भुजाएं) और हृदय पर लगाएं। शिव पुराण: नित्य भस्म धारण = संपूर्ण तीर्थों और यज्ञों का फल स्वतः।
रुद्राक्षरुद्राक्ष को सिद्ध कैसे करें पहनने से पहलेगंगाजल+दूध+शहद 24 घंटे → पंचामृत स्नान → शिव पूजा → 'ॐ नमः शिवाय' 108 बार (रुद्राक्ष हाथ में) → धूप → धारण। सरल विधि पर्याप्त। विस्तृत: पुरोहित से।#रुद्राक्ष#सिद्ध#अभिमंत्रित
अस्त्र शस्त्रमंत्र से अस्त्र कैसे उत्पन्न किया जाता था?बाण को धनुष पर चढ़ाकर देव का ध्यान और बीज-मंत्र उच्चारण से अभिमंत्रित किया जाता था। मन की एकाग्रता और शुद्धता अनिवार्य थी। अस्त्र की शक्ति वस्तु में नहीं — मंत्र और भाव में थी।#मंत्र अस्त्र#अभिमंत्रित#बीज मंत्र