पूजा अनुभवपूजा के बाद अत्यधिक प्रसन्नता का अनुभव होने का अर्थ क्या है?अर्थ: (1) देवता कृपा — पूजा स्वीकार (2) गीता: सात्विक सुख (अमृतोपम) (3) मन शुद्धि=ताज़गी (4) अनाहत चक्र सक्रिय (5) विज्ञान: Endorphin/Serotonin↑ (6) आत्मा-ईश्वर जुड़ाव=आनन्द। कृतज्ञता से स्वीकार, नित्य पूजा प्रेरणा, प्रसन्नता बाँटें।#प्रसन्नता#आनन्द#सात्विक सुख
रामचरितमानस — बालकाण्डअयोध्या वापसी पर नगरवासियों ने कैसे स्वागत किया?अपार आनन्द — नगर सजा, तोरण-पताकाएँ, मंगलगान। 'नगर नारि नर रूप निहारी। पाइ नयन फलु होहिं सुखारी' — बहुओं का रूप देख नेत्र-फल पाकर सुखी। ब्राह्मणों को दान, गरीबों को भोजन, अयोध्या उत्सवमय।
रामचरितमानस — बालकाण्डश्रीरामजी के जन्म पर अयोध्या में कैसा उत्सव मना?अपार आनन्द — रानियाँ दौड़ीं, दासियाँ हर्षित, पुरवासी मगन। दशरथ को मानो ब्रह्मानन्द मिला। नगर में बधावा, मंगलगान, ब्राह्मणों को दान।#बालकाण्ड#राम जन्म उत्सव#अयोध्या
पूजा अनुभवपूजा के बाद अत्यधिक प्रसन्नता का अनुभव होने का अर्थ क्या है?अर्थ: (1) देवता कृपा — पूजा स्वीकार (2) गीता: सात्विक सुख (अमृतोपम) (3) मन शुद्धि=ताज़गी (4) अनाहत चक्र सक्रिय (5) विज्ञान: Endorphin/Serotonin↑ (6) आत्मा-ईश्वर जुड़ाव=आनन्द। कृतज्ञता से स्वीकार, नित्य पूजा प्रेरणा, प्रसन्नता बाँटें।#प्रसन्नता#आनन्द#सात्विक सुख