विस्तृत उत्तर
श्रीरामजी के जन्म पर अयोध्या में अपार आनन्द और उत्सव मना। बच्चे के रोने की प्यारी ध्वनि सुनकर सब रानियाँ दौड़ीं, दासियाँ हर्षित हुईं, सारे पुरवासी आनन्द में मग्न हो गये।
चौपाई — 'सुनि सिसु रुदन परम प्रिय बानी। संभ्रम चलि आई सब रानी। हरषित जहँ तहँ धाई दासी। आनंद मगन सकल पुरबासी॥'
राजा दशरथ पुत्रजन्म सुनकर मानो ब्रह्मानन्द के समान आनन्दित हुए। नगर में बधावा बजा, घर-घर मंगलगान हुआ, ब्राह्मणों को दान दिये गये।





