मंदिर परम्परामंदिर में उत्सव मूर्ति और मूल मूर्ति में क्या अंतर है?मूल मूर्ति: गर्भगृह स्थायी, पत्थर/भारी, अचल, सर्वाधिक शक्तिशाली, भक्त स्पर्श नहीं, नित्य पूजा। उत्सव मूर्ति: पंचधातु/हल्की, चल — शोभायात्रा/रथ यात्रा, कुछ में स्पर्श अनुमत, लघु प्रतिरूप। उदाहरण: तिरुपति मूलवर=वेंकटेश्वर, उत्सवर=मलयप्पा। उत्सव मूर्ति = 'भगवान भक्तों के पास आते हैं'।#उत्सव मूर्ति#मूल मूर्ति#मूलवर
मंदिर संस्कारमंदिर में मूर्ति का विसर्जन कब और कैसे होता है?उत्सव मूर्ति: गणेश (अनन्त चतुर्दशी), दुर्गा (विजयदशमी)। विधि: उद्वासन पूजा → अंतिम आरती → शोभायात्रा → जल में विसर्जन + 'पुनरागमनाय च'। स्थायी: खंडित/पुरानी → उद्वासन → जल विसर्जन → नवीन+प्राण प्रतिष्ठा। पर्यावरण: मिट्टी+प्राकृतिक रंग, विसर्जन कुंड। तात्पर्य: अस्थायित्व का पाठ।#मूर्ति विसर्जन#प्रतिमा विसर्जन#उत्सव मूर्ति