लोकवितल लोक में पसीना और दुर्गंध क्यों नहीं होती?वितल में दिव्य रसायन और सिद्धियों के कारण पसीना, दुर्गंध और शारीरिक क्षय नहीं होता।#वितल पसीना#दुर्गंध#रसायन
लोकसुतल लोक में शरीर से दुर्गंध क्यों नहीं आती?सुतल लोक में दिव्य रसायनों के प्रभाव से पसीने में दुर्गंध नहीं होती।#सुतल शरीर#दुर्गंध#स्वेद
जीवन एवं मृत्युवैतरणी नदी में दुर्गंध का वर्णन कैसे किया गया है?वैतरणी नदी रक्त, मांस, मवाद, मल-मूत्र और सड़े-गले पदार्थों से 'दुर्गंधपूर्ण' बताई गई है। केशरूपी सेवार (काई) इसे और दुर्गम बनाती है। यह दुर्गंध पापी जीव के कुकर्मों का प्रतीक है।#वैतरणी नदी#दुर्गंध#गरुड़ पुराण