लोकत्रयोदशी श्राद्ध में तर्पण क्रम क्या है?देव, ऋषि, दिव्य मानव, फिर पितृ तर्पण।#तर्पण क्रम#देव तर्पण#पितृ तर्पण
मरणोपरांत आत्मा यात्रासूतक काल में देव-तर्पण और व्रत क्यों नहीं किए जाते?देव-तर्पण और व्रत सूतक में इसलिए नहीं किए जाते ताकि परिवार प्रेत की सद्गति पर केंद्रित रहे।#सूतक काल#देव तर्पण#व्रत
पुरश्चरणपुरश्चरण के दौरान तर्पण क्यों किया जाता है?मनुस्मृति: तीन ऋण — देव (हवन), ऋषि (तर्पण-स्वाध्याय), पितृ (तर्पण-श्राद्ध)। पुरश्चरण में तर्पण: देवता-तृप्ति, ऋषि-ऋण मुक्ति, पितृ-तृप्ति (पितृ-विघ्न दूर), हवन-दोष निवारण। तर्पण विधि: देव (तीर्थ), ऋषि (किनारे), पितृ (अंगूठे से)। संख्या = हवन का 10वाँ।#तर्पण#देव तर्पण#पितृ तर्पण