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नान्दीमुख से जुड़े सभी प्रश्न(3)

नान्दीमुख पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 3 प्रश्न उपलब्ध हैं।

श्राद्ध भेद

वृद्धिश्राद्ध किसे कहते हैं?

वृद्धिश्राद्ध वह श्राद्ध है जो किसी वृद्धि या शुभ अवसर पर पितरों को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। इसे ही नान्दीमुख श्राद्ध भी कहते हैं। यह विवाह, उपनयन यानी जनेऊ, पुत्र-जन्म, गृह-प्रवेश, या यज्ञ से पहले होता है। इसमें हर्ष का भाव प्रबल होता है, और देवताओं का भी आवाहन होता है। पितरों के आशीर्वाद से शुभ कार्य निर्विघ्न सम्पन्न होता है।

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श्राद्ध भेद

श्राद्ध के मुख्य 4 भेद कौन से हैं?

श्राद्ध के मुख्य चार भेद हैं — पार्वण, एकोद्दिष्ट, नान्दीमुख यानी वृद्धिश्राद्ध, और सपिण्डीकरण। पार्वण श्राद्ध तीन पीढ़ियों का सामूहिक आवाहन वाला, एकोद्दिष्ट एक पितर के लिए वार्षिक क्षयाह, नान्दीमुख शुभ अवसरों पर वृद्धि के लिए, और सपिण्डीकरण मृत्यु के बाद आत्मा को पितरों में मिलाने के लिए। द्वितीया पर पार्वण और एकोद्दिष्ट दोनों होते हैं।

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लोक

वृद्धिश्राद्ध क्या है?

वृद्धिश्राद्ध मांगलिक कार्यों के समय किया जाने वाला नान्दीमुख श्राद्ध है।

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