दिव्यास्त्रपाशुपतास्त्र का नाम 'पाशुपत' क्यों पड़ा?पाशुपतास्त्र का नाम भगवान शिव के 'पशुपति' नाम से है जिसका अर्थ है 'सभी जीवों के स्वामी'। यह शिव के उस अस्त्र का प्रतीक है।#पाशुपतास्त्र#पशुपति#नाम अर्थ
नाम और स्वरूपमाँ शैलपुत्री कौन हैं और उनके नाम का क्या अर्थ है?शैलपुत्री = 'शैल (पर्वत) की पुत्री।' जन्म = पर्वतराज हिमालय के घर। सती का पुनर्जन्म — दक्ष यज्ञ में आत्माहुति → हिमालय की पुत्री पार्वती के रूप में पुनर्जन्म। नवदुर्गा की प्रथम स्वरूपा। नवरात्रि के प्रथम दिन पूजा।#माँ शैलपुत्री
नाम और स्वरूपमाँ ब्रह्मचारिणी कौन हैं और उनके नाम का क्या अर्थ है?ब्रह्मचारिणी = 'ब्रह्म' (तप/ज्ञान) + 'चारिणी' (धारण करने वाली) = तप का आचरण करने वाली। माँ पार्वती का पूर्णतः तपस्विनी और संयमी रूप। सती के बाद नए जन्म में किशोरावस्था में कठोर तपस्या। शांत, ज्ञानमयी, धैर्यवान। नवरात्रि के दूसरे दिन पूजा।#माँ ब्रह्मचारिणी#द्वितीय दुर्गा#नाम अर्थ
नाम और स्वरूपमाँ कूष्मांडा कौन हैं और उनके नाम का क्या अर्थ है?कूष्मांडा = कु (थोड़ा) + ऊष्म (ऊर्जा/ताप) + अंड (अंडा) = 'छोटी सी ऊर्जा से ब्रह्मांडीय अंड का सृजन करने वाली।' मंद हास्य से ब्रह्मांड रचना। सृष्टि की आदिस्वरूपा। नवरात्रि के चौथे दिन पूजा।#माँ कूष्मांडा#चतुर्थ दुर्गा#नाम अर्थ
काशी के शिवलिंग'शंकुकर्ण' नाम का अर्थ और व्युत्पत्ति क्या है?'शंकु' (तीक्ष्ण/नुकीला) + 'कर्ण' (कान) = ब्रह्मांडीय नाद की सूक्ष्म आवृत्तियां ग्रहण करने में सक्षम सत्ता। यह शिवलिंग नाद-ब्रह्म का प्रतीक है — यहां मंत्र ब्रह्मांडीय ऊर्जा से अनुनाद स्थापित कर तत्काल फलित होते हैं।#शंकुकर्ण#नाम अर्थ#व्युत्पत्ति