विस्तृत उत्तर
ब्रह्मचारिणी नाम दो शब्दों से मिलकर बना है — 'ब्रह्म' तथा 'चारिणी'। इसका अर्थ है तप का आचरण करने वाली या ब्रह्म (तप/ज्ञान) को धारण करने वाली स्त्री।
इस रूप में माँ पार्वती पूर्णतः तपस्विनी व संयमी हैं। नवरात्रि के दूसरे दिन इनकी पूजा की जाती है।
पिछले जन्म (सती के रूप) में आत्माहुति देने के बाद नए जन्म में पार्वती ने किशोरावस्था में कठोर तपस्या की, इसलिए उन्हें ब्रह्मचारिणी कहा गया।
देवी ब्रह्मचारिणी का यह स्वरूप शांत, ज्ञानमयी और अत्यंत धैर्यवान माना जाता है।
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