विस्तृत उत्तर
सृष्टि के प्रारंभ में चारों ओर अंधकार एवं शून्यता थी। तब माता आदिशक्ति ने कूष्मांडा के रूप में प्रकट होकर एक हल्का हास्य किया, जिसकी ऊष्मा से एक छोटा सा अंड (ब्रह्माण्ड) उत्पन्न हुआ।
यही ब्रह्मांडीय अंड आगे चलकर पूरे विश्व का आधार बना। इसीलिए देवी को सृष्टि की उत्पत्ति कर्त्री और आदिस्वरूपा कहा जाता है।
देवी की कृपा से अल्प प्रयास में बड़े फल की प्राप्ति हो सकती है — जैसे माँ ने थोड़ी सी ऊर्जा से पूरी सृष्टि रच डाली।
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