उत्पत्ति की कथामाँ कूष्मांडा ने ब्रह्मांड की रचना कैसे की?ब्रह्मांड रचना: सृष्टि से पहले अंधकार-शून्यता → माँ कूष्मांडा ने मंद हास्य किया → ऊष्मा से छोटा ब्रह्मांडीय अंड उत्पन्न → यही पूरे विश्व का आधार। उनके प्रकाश से दसों दिशाएँ उज्ज्वल। एक अन्य: वैकुण्ठ में विष्णु हृदय से हँसकर ब्रह्मांड रचा।#ब्रह्मांड रचना#मंद हास्य#ऊष्मा अंड
नाम और स्वरूपमाँ कूष्मांडा को 'सृष्टि की आदिस्वरूपा' क्यों कहते हैं?'सृष्टि की आदिस्वरूपा' क्यों: सृष्टि से पहले अंधकार और शून्यता थी। माँ ने कूष्मांडा रूप में मंद हास्य किया → उस हास्य की ऊष्मा से ब्रह्मांडीय अंड उत्पन्न हुआ → यही पूरे विश्व का आधार बना। अल्प प्रयास से महान सृजन।
नवदुर्गामाँ कूष्मांडा का क्या स्वरूप और संदेश है?माँ कूष्मांडा = चतुर्थ स्वरूप (चौथा दिन)। अपनी मंद मुस्कान से संपूर्ण ब्रह्मांड (अंड) की रचना करने वाली। संदेश: आदि शक्ति — संपूर्ण सृष्टि की ऊर्जा और ऊष्मा का स्रोत।#कूष्मांडा#चतुर्थ दिन#ब्रह्मांड रचना