पूजा विधि एवं कर्मकांडपूजा में वस्त्र अर्पित करने का विधानवस्त्र अर्पण षोडशोपचार का सातवाँ उपचार है। स्नान के बाद देवताओं को जनेऊ और वस्त्र अर्पित किए जाते हैं। 'श्री [देवता] नमः वस्त्रं समर्पयामि' मंत्र से स्वच्छ कपड़े का प्रतीकात्मक अर्पण भी स्वीकार्य है।#वस्त्र अर्पण#देवता वस्त्र#षोडशोपचार
पूजा विधि एवं कर्मकांडपूजा में केले का पत्ता क्यों बिछाते हैंकेले के पत्ते में विष्णु का वास माना जाता है। यह सबसे शुद्ध प्राकृतिक पात्र है जिस पर नैवेद्य रखने से भोग पवित्र रहता है। इसमें पॉलिफेनोल्स होते हैं जो भोजन को एंटीऑक्सीडेंट गुण देते हैं। सत्यनारायण-भोग और यज्ञ में इसका उपयोग अनिवार्य है।
मंत्र जप नियममंत्र जपते समय सिर ढंकना जरूरी है क्यामंत्र जप के दौरान उत्पन्न आध्यात्मिक ऊर्जा को शरीर में सुरक्षित रखने और इष्ट देव के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए सिर ढंकना अत्यंत आवश्यक माना गया है।#सिर ढंकना#ऊर्जा संरक्षण#पूजा विधान