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प्रदक्षिणा से जुड़े सभी प्रश्न(5)

प्रदक्षिणा पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 5 प्रश्न उपलब्ध हैं।

सूर्य अर्घ्य

अर्घ्य के बाद प्रदक्षिणा और प्रणाम कैसे करते हैं?

अर्घ्य के बाद: अपने स्थान पर ही खड़े होकर तीन बार प्रदक्षिणा (परिक्रमा) करें। फिर सूर्य देव को साष्टांग (8 अंगों से) या पंचांग (5 अंगों से) प्रणाम करें।

#प्रदक्षिणा#साष्टांग प्रणाम#सूर्य अर्घ्य
षोडशोपचार पूजा

षोडशोपचार पूजा में प्रदक्षिणा क्या होती है?

षोडशोपचार में प्रदक्षिणा/नमस्कार = परिक्रमा करना और साष्टांग प्रणाम कर क्षमा मांगना — यह पूजा का सोलहवाँ और अंतिम उपचार है।

#प्रदक्षिणा#परिक्रमा#साष्टांग प्रणाम
मंदिर रहस्य

मंदिर में प्रदक्षिणा पथ पर नंगे पैर चलने का क्या वैज्ञानिक कारण है?

नंगे पैर: धार्मिक — पवित्रता, विनम्रता, ऊर्जा ग्रहण। वैज्ञानिक — Earthing (ऋणात्मक आयन = तनाव↓, रक्तसंचार↑), एक्यूप्रेशर (पैर तलवे = शरीर के बिन्दु), ताँबा/धातु ऊर्जा (मंदिर नींव), स्वच्छता। प्रदक्षिणा = ब्रह्माण्डीय गति।

#नंगे पैर#प्रदक्षिणा#ग्राउंडिंग
मंदिर

मंदिर में परिक्रमा क्यों की जाती है?

परिक्रमा क्यों: विष्णु पुराण: 'प्रत्येक पग पर जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट।' आगम शास्त्र: देव-ऊर्जा-क्षेत्र में भ्रमण। स्कंद पुराण: ब्रह्माण्डीय गति का अनुसरण। विनम्रता (देवता = केंद्र)। संख्या: शिव-अर्धपरिक्रमा, विष्णु-4, गणेश-3, दुर्गा-1 या 3।

#मंदिर#परिक्रमा#प्रदक्षिणा
शिव पूजा

शिव पूजा के बाद क्या करना चाहिए?

शिव पूजा के बाद: क्षमा-प्रार्थना ('आवाहनं न जानामि...') — अनिवार्य। अर्धपरिक्रमा (3 या 7 बार, जलधारी पार न करें)। पंचामृत प्रसाद + भस्म माथे पर। 10-20 मिनट मौन ध्यान। पुष्प/बिल्वपत्र पवित्र स्थान पर। नित्य 'ॐ नमः शिवाय' का मानसिक जप।

#शिव पूजा#पूजा के बाद#विसर्जन
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