बीज मंत्र परिचयबीज मंत्र को 'मंत्रों का प्राण' क्यों कहते हैं?जैसे प्राण के बिना शरीर निर्जीव है — वैसे बीज के बिना कोई भी बड़ा मंत्र शक्तिहीन और चैतन्य-रहित होता है। बीज ही मंत्र में चेतना का संचार करता है और उसे फलदायी बनाता है — इसीलिए बीज मंत्र 'मंत्रों का प्राण' कहलाते हैं।#मंत्रों का प्राण#चेतना संचार#शक्तिहीन
श्रीयंत्र और धातुभोजपत्र पर बने श्रीयंत्र का क्या फल है?भोजपत्र पर निर्मित श्रीयंत्र 6 वर्षों तक फलदायी होता है।#भोजपत्र श्रीयंत्र#6 वर्ष
शिव मंत्रशिव मंत्र का उपांशु जप और मानस जप में कौन अधिक फलदायी है?मानस (मन में) > उपांशु (फुसफुसाकर) > वाचिक (बोलकर)। शास्त्र: मानस = 100-1000 गुना फल। उपांशु = अनुष्ठान में सर्वाधिक प्रचलित। शुरुआत: उपांशु/वाचिक, अभ्यास बाद: मानस। भक्ति भाव सर्वोपरि।#उपांशु#मानस#जप