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बृहदारण्यक उपनिषद से जुड़े सभी प्रश्न(3)

बृहदारण्यक उपनिषद पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 3 प्रश्न उपलब्ध हैं।

दर्शन

अहं ब्रह्मास्मि का अर्थ क्या है?

अहं ब्रह्मास्मि = 'मैं ब्रह्म हूँ।' बृहदारण्यक उपनिषद (1.4.10)। यह अहंकार नहीं, आत्मज्ञान का उद्घोष है — शुद्ध चैतन्य (शरीर-मन से परे) ही ब्रह्म है। लहर = समुद्र, कंगन = सोना। इस अनुभव को प्राप्त करना ही मोक्ष।

#अहं ब्रह्मास्मि#महावाक्य#बृहदारण्यक उपनिषद
लोक

बृहदारण्यक उपनिषद् में याज्ञवल्क्य ने देवों का कौन सा वर्गीकरण दिया?

याज्ञवल्क्य ने 33 देवों को 8 वसु, 11 रुद्र, 12 आदित्य, इन्द्र और प्रजापति में वर्गीकृत किया।

#बृहदारण्यक उपनिषद#याज्ञवल्क्य#33 देव
दर्शन

नेति नेति का अर्थ क्या है उपनिषदों में?

'नेति नेति' (यह नहीं, यह नहीं) = बृहदारण्यक उपनिषद (2.3.6)। ब्रह्म को जानने की निषेध विधि — जो कुछ भी सीमित/नाशवान/दृश्य है, वह ब्रह्म नहीं। सब नकार दो, जो शेष बचे वही ब्रह्म। शंकराचार्य: यह शून्य नहीं, अतिरेक है।

#नेति नेति#बृहदारण्यक उपनिषद#निर्गुण ब्रह्म
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