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मृत्युंजय से जुड़े सभी प्रश्न(6)

मृत्युंजय पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 6 प्रश्न उपलब्ध हैं।

लोक

सत्यलोक को मृत्युंजय लोक क्यों कहते हैं?

सत्यलोक में नैमित्तिक प्रलय तक कोई मृत्यु नहीं होती और निवासी 15,480 अरब वर्ष जीवित रहते हैं। इसीलिए इसे मृत्युंजय लोक कहते हैं।

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लोक

सत्यलोक में मृत्यु होती है क्या?

सत्यलोक में सामान्य मृत्यु नहीं होती — इसे मृत्युंजय लोक कहते हैं। पर महाप्रलय में सत्यलोक भी नष्ट होता है और निवासी वैकुंठ प्रवेश करते हैं।

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लोक

सत्यलोक में बुढ़ापा होता है क्या?

नहीं, सत्यलोक में बुढ़ापा नहीं होता। भागवत (2.2.27) कहता है — न शोक, न जरा, न मृत्यु। इसीलिए इसे मृत्युंजय लोक कहते हैं।

#सत्यलोक#बुढ़ापा#जरा
मंत्र सिद्धि

महामृत्युंजय मंत्र सिद्धि कैसे करें?

महामृत्युंजय = 33 अक्षर → पुरश्चरण = 33 लाख। रुद्राक्ष माला अनिवार्य। सोमवार, महाशिवरात्रि, ग्रहण काल विशेष। हवन: तिल-जौ-दूर्वा-घी। रोगी की ओर से परिवार भी कर सकता है। ध्यान: त्र्यम्बक शिव — तीन नेत्र, चंद्रमौलि। सिद्धि: शरीर में उष्णता, स्वप्न में नीलकंठ दर्शन।

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मंत्र ज्ञान

शिव जी का महामृत्युंजय मंत्र क्या है?

महामृत्युंजय मंत्र है — 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥' यह ऋग्वेद (7.59.12) का मंत्र है। अर्थ — तीन नेत्रों वाले शिव हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें।

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शिव मंत्र

मृत्युंजय मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र में क्या अंतर है?

मृत्युंजय = ऋग्वेद 7.59.12 मूल श्लोक ('ॐ त्र्यम्बकं यजामहे...')। महामृत्युंजय = मूल + बीज (हौं जूं सः) + व्याहृति = तांत्रिक विस्तार, अधिक शक्तिशाली। मूल = सभी, बिना दीक्षा। बीज सहित = गुरु श्रेष्ठ। 33 अक्षर = 33 देवता। मार्कंडेय ने मृत्यु जीती।

#मृत्युंजय#महामृत्युंजय#अंतर
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