विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत पुराण के द्वितीय स्कन्ध (२.२.२७) में स्पष्ट किया गया है कि सत्यलोक में न तो किसी बात का शोक है, न बुढ़ापा (जरा) है और न ही मृत्यु का भय है। इसीलिए सत्यलोक को मृत्युंजय लोक भी माना जाता है। यद्यपि सत्यलोक भौतिक ब्रह्माण्ड की सीमा के भीतर है और शाश्वत वैकुण्ठ की भाँति सनातन नहीं है तथापि वहाँ के निवासियों की आयु ब्रह्मा जी के जीवनकाल के समान होती है। इस वैदिक काल-गणना के आधार पर सत्यलोक का सम्पूर्ण जीवनकाल 15,480 अरब मानव वर्षों का बताया गया है। इस अकल्पनीय अवधि तक सत्यलोक के निवासी पूर्ण आनन्द, योग के अमृत और असीम ज्ञान का रसपान करते हुए निवास करते हैं।
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