पुराण माहात्म्यरौरव और कालसूत्र नरक क्या हैं?रौरव और कालसूत्र दो भयंकर नरक हैं। रौरव में रौरव सर्पों का काटना और अग्नि की जलन होती है। कालसूत्र में काल के धागों से बाँधकर यातना दी जाती है। स्कन्द पुराण के नागर खण्ड के अनुसार जो व्यक्ति द्वितीया तिथि पर अधिकार होने पर भी महालय का श्राद्ध नहीं करता, उसे मृत्यु के बाद इन दोनों भयंकर नरकों की यातना भोगनी पड़ती है।#रौरव नरक#कालसूत्र नरक#नरक यातना
पुराण माहात्म्यद्वितीया श्राद्ध न करने से क्या होता है?द्वितीया श्राद्ध न करने पर तीन दुष्परिणाम होते हैं। पहला, भगवान शम्भु यानी शिव कुपित होते हैं। दूसरा, उस व्यक्ति के ब्रह्म-वर्चस्व यानी तेज और पुण्य का सर्वथा नाश हो जाता है। तीसरा, मृत्यु के बाद रौरव और कालसूत्र नामक भयंकर नरकों की यातना भोगनी पड़ती है। स्कन्द पुराण नागर खण्ड अध्याय 230 में यह स्पष्ट वर्णन है।
लोकरौरव नरक में कौन सा दंड मिलता है?रौरव नरक में पीड़ित जीव रुरु बनकर पापी को नोचते हैं, क्योंकि उसने स्वार्थ से जीवों को कष्ट दिया था।#रौरव नरक#नरक दंड#रुरु
जीवन एवं मृत्युरौरव नरक में जीव को कैसे काटा जाता है?रौरव में — रुरु नामक भयानक जीव नोचता-काटता है, झूठी गवाही वाले को ईख की तरह पेरा जाता है। अग्निकुंड में जलाया जाता है। 'रौरव नाम रुरु जीव के कारण।'#रौरव नरक#यातना#रुरु जीव
जीवन एवं मृत्युकिस पाप के लिए रौरव नरक मिलता है?रौरव नरक — झूठी गवाही (ईख की तरह पेरना), लालच-ईर्ष्या, निर्दोष को कष्ट देना, पत्नी को प्रताड़ित करना और झूठ बोलना — इन पापों से रौरव नरक मिलता है।#रौरव नरक#पाप#झूठी गवाही
जीवन एवं मृत्युरौरव नरक में क्या कष्ट मिलता है?रौरव नरक में — विशाल अग्निकुंड, जलती भूमि, लोहे के तीरों से बींधना, ईख की तरह पेरना और रुरु सर्पों का दंश। मृत्यु नहीं आती — यातना तब तक जारी।#रौरव नरक#कष्ट#यातना
जीवन एवं मृत्युरौरव नरक में किसे भेजा जाता है?रौरव नरक में — झूठी गवाही देने वाले, लालची-ईर्ष्यालु-स्वार्थी, झूठ बोलने वाले, निर्दोष को कष्ट देने वाले और पत्नी को प्रताड़ित करने वाले भेजे जाते हैं।#रौरव नरक#पात्र#झूठी गवाही
जीवन एवं मृत्युरौरव नरक क्या है?रौरव = 'रुरु सर्प' या 'चीत्कार' से बना नाम। 21 प्रमुख नरकों में से एक। विशाल अग्निकुंड, जलती भूमि, लोहे के जलते तीरों से बींधना, ईख की तरह पेरना — यह रौरव नरक का स्वरूप है।#रौरव नरक#परिभाषा#नरक