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शिव नाग पूजा से जुड़े सभी प्रश्न(3)

शिव नाग पूजा पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 3 प्रश्न उपलब्ध हैं।

कालसर्प और पितृदोष

पितृदोष शमन के लिए कालसर्प पूजा कब करें?

पितृदोष शमन के लिए कालसर्प पूजा अमावस्या के दिन किसी पीपल वृक्ष के नीचे या प्राचीन शिव मंदिर में करें — इसके बाद नारायण बली या त्रिपिंडी श्राद्ध करने से दोनों दोषों का पूर्ण शमन होता है।

#अमावस्या#पितृदोष शमन#पीपल वृक्ष
कालसर्प और पितृदोष

कालसर्प दोष पितृदोष से कैसे जुड़ा है?

नाग पाताल के निवासी हैं और पितर भी पितृलोक (पाताल-क्षेत्र) में रहते हैं — इसीलिए शिव-नाग पूजा एक साथ नाग-शाप और पितृ-शाप दोनों का शमन करती है।

#कालसर्प पितृदोष#नाग पाताल#पितर
शिव-नाग संयुक्त सिद्धांत

कालसर्प दोष के लिए शिव और नाग दोनों की पूजा क्यों जरूरी है?

क्योंकि कालसर्प दोष 'काल' (शिव) द्वारा 'सर्प' (नाग) के माध्यम से दिया गया कार्मिक दण्ड है — इसलिए दण्ड-अधिकारी (नाग) और स्वामी (शिव) दोनों की संयुक्त पूजा ही एकमात्र पूर्ण उपाय है।

#शिव नाग पूजा#संयुक्त साधना#कालसर्प शांति
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