कालसर्प और पितृदोषपितृदोष शमन के लिए कालसर्प पूजा कब करें?पितृदोष शमन के लिए कालसर्प पूजा अमावस्या के दिन किसी पीपल वृक्ष के नीचे या प्राचीन शिव मंदिर में करें — इसके बाद नारायण बली या त्रिपिंडी श्राद्ध करने से दोनों दोषों का पूर्ण शमन होता है।#अमावस्या#पितृदोष शमन#पीपल वृक्ष
कालसर्प और पितृदोषकालसर्प दोष पितृदोष से कैसे जुड़ा है?नाग पाताल के निवासी हैं और पितर भी पितृलोक (पाताल-क्षेत्र) में रहते हैं — इसीलिए शिव-नाग पूजा एक साथ नाग-शाप और पितृ-शाप दोनों का शमन करती है।#कालसर्प पितृदोष
शिव-नाग संयुक्त सिद्धांतकालसर्प दोष के लिए शिव और नाग दोनों की पूजा क्यों जरूरी है?क्योंकि कालसर्प दोष 'काल' (शिव) द्वारा 'सर्प' (नाग) के माध्यम से दिया गया कार्मिक दण्ड है — इसलिए दण्ड-अधिकारी (नाग) और स्वामी (शिव) दोनों की संयुक्त पूजा ही एकमात्र पूर्ण उपाय है।#शिव नाग पूजा#संयुक्त साधना#कालसर्प शांति