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श्रीविद्या से जुड़े सभी प्रश्न(3)

श्रीविद्या पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 3 प्रश्न उपलब्ध हैं।

तंत्र साधना

तंत्र में कुल पूजा और समय पूजा में क्या अंतर है?

समय पूजा: आन्तरिक — षट्चक्रों में ध्यान, कुंडलिनी योग, सात्विक, मोक्ष-प्रधान (शंकराचार्य परम्परा)। कुल पूजा: बाह्य+आन्तरिक — यंत्र, हवन, पंचमकार सम्भव, भोग+मोक्ष (कुलार्णव तंत्र)। अभिनवगुप्त: दोनों का चरम लक्ष्य एक — शिव-शक्ति ऐक्य।

#कुल पूजा#समय पूजा#कौलाचार
तंत्र साधना

श्रीविद्या साधना क्या है?

श्रीविद्या = त्रिपुरसुंदरी की पूर्ण उपासना — मंत्र + यंत्र + तंत्र का समन्वय। तीन आधार: पंचदशाक्षरी (वाग्भव + कामराज + शक्ति खण्ड), श्री यंत्र (9 त्रिकोण + ब्रह्माण्ड-नक्शा), नवावरण पूजा। दीक्षा अनिवार्य: समय → पूर्णाभिषेक → महापूर्णाभिषेक। फल: सौंदर्य-विद्या-धन-मोक्ष — सभी पुरुषार्थ।

#श्रीविद्या#त्रिपुरसुंदरी#श्री यंत्र
तंत्र साधना

त्रिपुरा सुंदरी साधना क्या है?

त्रिपुरसुंदरी = ललिता = षोडशी = श्रीविद्या की सर्वोच्च देवी। मंत्र: पंचदशाक्षरी (15 अक्षर — गुरु-दत्त), षोडशी (16 अक्षर — उच्चतम)। यंत्र: श्री यंत्र। वस्त्र: लाल रेशम। पुरश्चरण: 15 लाख। विशेषता: सौम्य तंत्र — सौंदर्य, लक्ष्मी, विद्या, और मोक्ष। श्रीविद्या = इन्हीं की विद्या।

#त्रिपुरसुंदरी#षोडशी#ललिता
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