दार्शनिक महत्त्व और उपनिषदश्वेताश्वतर उपनिषद में शिव का क्या वर्णन है?श्वेताश्वतर उपनिषद = शिव तत्त्व और ब्रह्म विद्या का सर्वाधिक गहन-प्रामाणिक वर्णन। 6 अध्याय: जगत का मूल कारण, ध्यानयोग, परमात्मा की सर्वव्यापकता। उपासना = बाह्य क्रिया नहीं, आत्मा को परमात्मा से मिलाने की आंतरिक यात्रा।#श्वेताश्वतर उपनिषद#परब्रह्म#सर्वव्यापक
शिव-पार्वती तत्त्व: दार्शनिक रहस्यश्वेताश्वतर उपनिषद में माया-तत्त्व का क्या वर्णन है?श्वेताश्वतर उपनिषद: 'मायां तु प्रकृतिं विद्यान्मायिनं तु महेश्वरम्' — माया = प्रकृति (पार्वती), माया के स्वामी = महेश्वर (शिव)। पार्वती प्रत्येक जीव में कुंडलिनी शक्ति रूप में सुप्त हैं। सहस्रार में शिव से मिलने पर मोक्ष।
साक्षी का तत्व दर्शनश्वेताश्वतर उपनिषद में साक्षी के बारे में क्या कहा गया है?श्वेताश्वतर उपनिषद (6.11): 'एको देवः सर्वभूतेषु गूढः... साक्षी चेता केवलो निर्गुणश्च' — एक ही देव सभी प्राणियों में छिपा है, वह साक्षी, चैतन्य, विशुद्ध और गुणों से परे है।#श्वेताश्वतर उपनिषद#एको देवः#सर्वव्यापी