लोकभुवर्लोक में रहने वाली आत्माओं की त्रिगुणात्मक स्थिति क्या होती है?ऊपरी भुवर्लोक के सिद्धादि रजो-सात्त्विक हैं जबकि निचले भुवर्लोक के प्रेतादि तमोगुण प्रधान हैं। दोनों ही पूर्णतः सत्वगुणी न होने से मोक्ष नहीं पाते।#त्रिगुण#भुवर्लोक#सत्व रज तम
शिव प्रतीकशिव के त्रिशूल के तीन शूलों का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?शिव पुराण: सृष्टि आरंभ में सत्व-रज-तम से त्रिशूल बना। विष्णु पुराण: विश्वकर्मा ने सूर्यांश से निर्माण किया। 7 अर्थ: त्रिगुण, त्रिकाल, त्रिदेव, त्रिलोक, तीन कष्ट (आधिदैविक-आधिभौतिक-आध्यात्मिक), तीन नाड़ियां (इड़ा-पिंगला-सुषुम्ना), पवित्रता।
शिव अस्त्र-शस्त्रत्रिशूल के तीन बिंदुओं का क्या अर्थ है शिव पुराण मेंत्रिशूल के तीन शूल — तीन गुण (सत-रज-तम), तीन काल (भूत-भविष्य-वर्तमान), तीन ताप (दैहिक-दैविक-भौतिक) और तीन लोकों के अधिपति शिव की सर्वशक्तिमता के प्रतीक हैं।#त्रिशूल प्रतीक#तीन शूल अर्थ#सत्व रज तम