दस महाविद्याधूमावती माता की साधना विधवा देवी की उपासना क्यों कहते हैं?धूमावती = सातवीं महाविद्या, 'विधवा देवी'। स्वरूप: वृद्ध, धूमिल वस्त्र, सूप, कौवा वाहन। कथा: पार्वती ने शिव निगले → धुएं से बाहर → विधवा श्राप। दार्शनिक: अशुभ में शुभ, वैराग्य/नश्वरता प्रतीक। अलक्ष्मी शांत → लक्ष्मी प्राप्ति। गुरु दीक्षा अनिवार्य। शनिवार/अमावस्या विशेष।#धूमावती#विधवा देवी#सातवीं महाविद्या
परिचय और स्वरूपमाँ धूमावती कौन हैं — दस महाविद्याओं में इनका क्या स्थान है?माँ धूमावती = दस महाविद्याओं में सातवीं (कुछ मतों में अंतिम) महाविद्या। प्रलय काल में प्रकट होती हैं। 'शून्य' और 'अभाव' का प्रतिनिधित्व। सांसारिक मोह-त्याग का प्रतीक। धूमावती साधना = शून्यता और अभाव की शक्ति को समझना।