लोकवायु पुराण भुवर्लोक को 'प्राण-मनस लोक' क्यों कहता है?वायु पुराण भुवर्लोक को प्राण-मनस लोक इसलिए कहता है क्योंकि यह वायु (प्राण) तत्व से बना है, यहाँ की सत्ताएं प्राणमय हैं और यह स्थूल तथा आध्यात्मिक जगत के बीच की कड़ी है।#वायु पुराण#भुवर्लोक#प्राण मनस
लोकपितर अलग योनि में हों तो श्राद्ध कैसे मिलता है?श्राद्ध अन्न पितर की योनि के अनुसार अमृत, भोग, चारा या वायु बन जाता है।#पितर अलग योनि#श्राद्ध अन्न
रोग निवारणडाकिनी ग्रह पीडिता क्या होता है?डाकिनी ग्रह पीडिता का अर्थ है नकारात्मक आत्माओं और ग्रहीय बाधाओं से पीड़ित — महेश्वर कवचम् इनसे तत्काल रक्षा प्रदान करता है।#डाकिनी#ग्रह पीड़ा#नकारात्मक आत्मा