लोकअपराह्न में श्राद्ध क्यों करें?अपराह्न में सूर्य की ऊर्जा पितरों तक पहुँचती मानी गई है।#अपराह्न श्राद्ध#सूर्य ऊर्जा#पितृ कर्म
उत्पत्ति की कथामाँ कूष्मांडा और सूर्यलोक का क्या संबंध है?माँ कूष्मांडा और सूर्यलोक: देवी भगवत पुराण — सूर्यमंडल में निवास करके अपनी ऊर्जा से सूर्य सहित समस्त ग्रह-नक्षत्रों को तेज दिया। एकमात्र शक्ति जो सूर्यलोक के भीतरी भाग में निवास कर सकती हैं। उनके तेज से ही सूर्य प्रकाशमान होता है।#सूर्यलोक#सूर्य ऊर्जा#देवी भगवत पुराण
सूर्य अर्घ्यअर्घ्य में तांबे का लोटा क्यों इस्तेमाल करते हैं?तांबे का लोटा क्यों: शास्त्र = तांबा सूर्य की ऊर्जा को ग्रहण और परावर्तित करने में सर्वाधिक सक्षम धातु। तांबे के पात्र का उपयोग और दान = आयु, आरोग्य और तेज में वृद्धि।#तांबे का लोटा#सूर्य ऊर्जा#धातु