माँ तारा के भैरव = अक्षोभ्य ऋषि — शिव का शांत और स्थिर स्वरूप, मस्तक पर स्थित। 'अक्षोभ्य' = जिसे क्षुब्ध न किया जा सके। संदेश: असीम शक्ति और ज्ञान को धारण-संतुलित करने के लिए परम शांति और स्थिरता आवश्यक।
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