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महत्व

तपस्या का महत्व(3)

तपस्या का अर्थतपस्या क्या है?तपस्या का महत्व
सरल उत्तर

तैत्तिरीय उपनिषद (3/1) में 'तपो ब्रह्म' — तप ही ब्रह्म है। भृगु ने बार-बार तप करके आनंदमय ब्रह्म को जाना। छान्दोग्य (8/5/1) — 'ब्रह्मचर्यमेव तपः' — ब्रह्मचर्य ही सबसे श्रेष्ठ तप है। कठोपनिषद (2/24) — आत्मा बलहीन को नहीं मिलती — यह बल तपस्या का है।

स्रोत प्रश्न: उपनिषद में तपस्या का महत्व क्या है? →
व्रत-पूर्व तैयारी

रुद्राक्ष का महत्व और उत्पत्ति क्या है?

रुद्राक्ष = शिव के हजारों वर्षों की तपस्या के बाद नेत्र खोलने पर गिरे अश्रुओं से उत्पन्न। मंत्रों के सूक्ष्म स्पंदन अवशोषित कर चेतना ऊर्ध्वगामी बनाता है। एकमुखी = परब्रह्म; पंचमुखी = पाप नाश; चतुर्दशमुखी = परम शिव स्वरूप।

#रुद्राक्ष उत्पत्ति#शिव अश्रु#तपस्या
शास्त्र ज्ञान

उपनिषद में तपस्या का महत्व क्या है?

तैत्तिरीय उपनिषद (3/1) में 'तपो ब्रह्म' — तप ही ब्रह्म है। भृगु ने बार-बार तप करके आनंदमय ब्रह्म को जाना। छान्दोग्य (8/5/1) — 'ब्रह्मचर्यमेव तपः' — ब्रह्मचर्य ही सबसे श्रेष्ठ तप है। कठोपनिषद (2/24) — आत्मा बलहीन को नहीं मिलती — यह बल तपस्या का है।

#तपस्या#उपनिषद#तप
वेद ज्ञान

वेदों में तपस्या का महत्व क्या है?

वेदों में तपस्या को सृष्टि का आदि-कारण माना गया है (ऋग्वेद 10/129)। अथर्ववेद (11/5/1) में ब्रह्मचर्य-तप से देवताओं ने मृत्यु पर विजय पाई। तैत्तिरीय उपनिषद (3/1) — 'तपो ब्रह्म' — तप ही ब्रह्म है।

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और महत्व
अन्य शब्दों के महत्व

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