उपनिषद में भक्ति का महत्व क्या है?
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श्वेताश्वतर उपनिषद (6/23) में 'यस्य देवे परा भक्तिः' — ईश्वर और गुरु में परम भक्ति हो तो ही उपनिषद-ज्ञान प्रकट होता है। मुण्डकोपनिषद (3/1/5) में आत्मा उसी के लिए प्रकट होती है जिसे वह चुनती है — यह चुनाव भक्ति और प्रेम पर आधारित है।
स्रोत प्रश्न: उपनिषद में भक्ति का महत्व क्या है? →सनातन धर्म के सभी प्रमुख शब्दों के महत्व।
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