उपनिषदों में साधना का मूल मार्ग है — श्रवण → मनन → निदिध्यासन (बृहदारण्यक 4/4/22)। साधन-चतुष्टय — विवेक, वैराग्य, षट्सम्पत्ति और मुमुक्षुत्व — वेदांत साधना के चार अनिवार्य अंग हैं। छान्दोग्य (7/26) — आहार-शुद्धि से मन-शुद्धि और मन-शुद्धि से ब्रह्म-साक्षात्कार।
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