ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
देवप्रयाग, उत्तराखंड

देवप्रयाग — पंचांग

6 अक्टूबर 2025, सोमवार

सूर्योदय
06:12
सूर्यास्त
17:55
चंद्रोदय
17:21
चंद्रास्त
05:01
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अक्टूबर 2025 — मासिक पंचांग

पंचक चल रहा है
पंचक काल में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं

पंचांग — पाँच अंग

तिथि
शुक्ल चतुर्दशी
12:24 तक
अगली: शुक्ल पूर्णिमा
प्रगति71%
नक्षत्र
पूर्वभाद्रपद (4 पाद)
06:15 तक
अगली: उत्तरभाद्रपद
स्वामी: बृहस्पति
योग
वृद्धि
13:13 तक
अगला: ध्रुव
शुभ
करण
वणिज
00:00 तक
अगला: विष्टि
शुभ
वार
सोमवार

पंचांग सार

तिथि
शुक्ल चतुर्दशी· 12:24 तक
शुक्ल पूर्णिमा
नक्षत्र
पूर्वभाद्रपद · पद 4· 06:15 तक
उत्तरभाद्रपद
योग
वृद्धि· 13:13 तक
ध्रुव
करण
वणिज· 00:00 तक
विष्टि
वार
सोमवार
पक्ष
शुक्ल पक्ष

ग्रह स्थिति

सूर्य
राशिकन्या
नक्षत्रहस्त
पद3
देशांतर168°48'54"
चन्द्रमा
राशिमीन
नक्षत्रपूर्वभाद्रपद
पद4
देशांतर333°17'12"

राशि

चंद्र राशि
मीन
सूर्य राशि
कन्या

देवप्रयाग — शुभ-अशुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:36 — 05:24
प्रातः सन्ध्या
05:24 — 07:00
सूर्योदय
06:12
अभिजित मुहूर्त
11:39 — 12:27
अमृत कालविशेष
06:12 — 07:40
विजय मुहूर्त
15:34 — 16:21
गोधूलि मुहूर्त
17:31 — 18:19
सूर्यास्त
17:55
सायाह्न सन्ध्या
17:58 — 19:07
निशिता मुहूर्त
23:39 — 00:27
राहु काल
07:40 — 09:08
यमगंड काल
09:08 — 10:36
गुलिक काल
13:31 — 14:59
प्रथम दुर्मुहूर्त
10:36 — 11:20
द्वितीय दुर्मुहूर्त
13:31 — 14:15
चंद्रोदय
17:21
चंद्रास्त
05:01
मध्याह्न
12:03

हिन्दू पंचांग — संवत् एवं मास

चन्द्र माह (पूर्णिमान्त)
आश्विन
चन्द्र माह (अमान्त)
आश्विन
पक्ष
शुक्ल पक्ष
विक्रम संवत्
2082
शक संवत्
1947
गुजराती संवत्
2080

नक्षत्र विस्तार

नक्षत्र पद
पद 4
पूर्वभाद्रपद
नक्षत्र स्वामी
बृहस्पति
नक्षत्र देवता
अजैकपाद
सूर्य नक्षत्र
हस्त
पद 3स्वामी: चंद्र

ऋतु एवं अयन

वैदिक ऋतु
शरद
द्रिक ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

दिनमान एवं रात्रिमान

दिनमान
11 घण्टे 43 मिनट 10 सेकण्ड
29 घटी 18 पल
रात्रिमान
12 घण्टे 16 मिनट 50 सेकण्ड
30 घटी 42 पल
मध्याह्न (सौर)
12:03
सूर्य का उच्चतम बिन्दु

दिन का चौघड़िया — 6 अक्टूबर 2025, सोमवार

अमृतशुभलाभचरकालउद्वेगरोग
06:1207:40
अमृत
सभी शुभ कार्य, पूजा, विवाह
07:4009:08
काल
महत्वपूर्ण निर्णय टालें
09:0810:36
शुभ
विवाह, गृह प्रवेश, मांगलिक कार्य
10:3612:03
रोग
स्वास्थ्य निर्णय टालें
12:0313:31
उद्वेग
नया काम प्रारंभ न करें
13:3114:59
चर
यात्रा, वाहन चालन
14:5916:27
लाभ
व्यापार, धन लेनदेन, नौकरी
16:2717:55
अमृत
सभी शुभ कार्य, पूजा, विवाह

रात का चौघड़िया

17:5519:27
चर
यात्रा, वाहन चालन
19:2720:59
लाभ
व्यापार, धन लेनदेन, नौकरी
20:5922:31
अमृत
सभी शुभ कार्य, पूजा, विवाह
22:3100:03
काल
महत्वपूर्ण निर्णय टालें
00:0301:36
शुभ
विवाह, गृह प्रवेश, मांगलिक कार्य
01:3603:08
रोग
स्वास्थ्य निर्णय टालें
03:0804:40
उद्वेग
नया काम प्रारंभ न करें
04:4006:12
चर
यात्रा, वाहन चालन

देवप्रयाग पंचांग — अक्टूबर 2025

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अन्य शहरों का पंचांग — 6 अक्टूबर 2025, सोमवार

दिल्लीमुंबईकोलकाताचेन्नईबेंगलुरुहैदराबादअहमदाबादपुणेजयपुरलखनऊवाराणसीप्रयागराज

देवप्रयाग पंचांग — 6 अक्टूबर 2025, सोमवार

देवप्रयाग (उत्तराखंड) के लिए 6 अक्टूबर 2025, सोमवार का सम्पूर्ण हिन्दू पंचांग यहाँ प्रस्तुत है। पंचांग के पाँच अंग — तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार — के साथ-साथ सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय, राहु काल, यमगंड काल, गुलिक काल, ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित मुहूर्त और चौघड़िया की सटीक जानकारी दी गई है।

यह पंचांग देवप्रयाग के अक्षांश-देशांतर के अनुसार खगोलीय गणना पर आधारित है, जिससे सूर्योदय और अन्य समय स्थानीय रूप से सटीक हैं। किसी भी शुभ कार्य, पूजा, व्रत या मुहूर्त के लिए अपने शहर का पंचांग अवश्य देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देवप्रयाग में 6 अक्टूबर 2025, सोमवार को सूर्योदय कब है?

देवप्रयाग में 6 अक्टूबर 2025, सोमवार को सूर्योदय 06:12 बजे और सूर्यास्त 17:55 बजे है। ये समय खगोलीय गणना के आधार पर सटीक हैं।

देवप्रयाग में 6 अक्टूबर 2025, सोमवार को राहु काल कब है?

देवप्रयाग में 6 अक्टूबर 2025, सोमवार को राहु काल 07:40 से 09:08 तक है। इस समय नए कार्य प्रारंभ न करें।

देवप्रयाग में 6 अक्टूबर 2025, सोमवार को तिथि क्या है?

देवप्रयाग में 6 अक्टूबर 2025, सोमवार को शुक्ल चतुर्दशी तिथि है।

पंचांग के पाँच अंग कौन से हैं?

पंचांग के पाँच अंग हैं — तिथि (चंद्र दिन), नक्षत्र (चंद्र मंडल), योग (सूर्य-चंद्र संयोग), करण (अर्ध-तिथि) और वार (सप्ताह का दिन)। ये पाँचों मिलकर किसी भी दिन की शुभता निर्धारित करते हैं।

अभिजित मुहूर्त किसे कहते हैं?

अभिजित मुहूर्त दिन का सबसे शुभ समय है, जो सौर मध्याह्न (solar noon) के आसपास 48 मिनट का होता है। बृहत्संहिता के अनुसार यह दिन का आठवाँ मुहूर्त है।