ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
धर्मस्थल, कर्नाटक

धर्मस्थल — पंचांग

14 मार्च 2027, रविवार

सूर्योदय
06:37
सूर्यास्त
18:39
चंद्रोदय
10:43
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मार्च 2027 — मासिक पंचांग

सर्वार्थ सिद्धि योग
14 मार्च 2027, रविवार को सर्वार्थ सिद्धि योग है — सभी शुभ कार्यों के लिए उत्तम दिन

पंचांग — पाँच अंग

तिथि
शुक्ल षष्ठी
12:32 तक
अगली: शुक्ल सप्तमी
प्रगति74%
नक्षत्र
कृत्तिका (4 पाद)
10:23 तक
अगली: रोहिणी
स्वामी: सूर्य
योग
विष्कम्भ
17:09 तक
अगला: प्रीति
अशुभ
करण
तैतिल
00:00 तक
अगला: गर
शुभ
वार
रविवार

पंचांग सार

तिथि
शुक्ल षष्ठी· 12:32 तक
शुक्ल सप्तमी
नक्षत्र
कृत्तिका · पद 4· 10:23 तक
रोहिणी
योग
विष्कम्भ· 17:09 तक
प्रीति
करण
तैतिल· 00:00 तक
गर
वार
रविवार
पक्ष
शुक्ल पक्ष

ग्रह स्थिति

सूर्य
राशिकुम्भ
नक्षत्रपूर्वभाद्रपद
पद3
देशांतर328°59'36"
चन्द्रमा
राशिवृषभ
नक्षत्रकृत्तिका
पद4
देशांतर37°49'37"

राशि

चंद्र राशि
वृषभ
सूर्य राशि
कुम्भ

धर्मस्थल — शुभ-अशुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:01 — 05:49
प्रातः सन्ध्या
05:49 — 07:25
सूर्योदय
06:37
अभिजित मुहूर्त
12:14 — 13:02
अमृत कालविशेष
11:08 — 12:38
विजय मुहूर्त
16:14 — 17:03
गोधूलि मुहूर्त
18:15 — 19:03
सूर्यास्त
18:39
सायाह्न सन्ध्या
18:42 — 19:51
निशिता मुहूर्त
00:14 — 01:02
राहु काल
17:09 — 18:39
यमगंड काल
11:08 — 12:38
गुलिक काल
15:38 — 17:09
प्रथम दुर्मुहूर्त
11:08 — 11:53
द्वितीय दुर्मुहूर्त
17:54 — 18:39
चंद्रोदय
10:43
मध्याह्न
12:38
सर्वार्थ सिद्धि योगसम्पूर्ण दिन

हिन्दू पंचांग — संवत् एवं मास

चन्द्र माह (पूर्णिमान्त)
फाल्गुन
चन्द्र माह (अमान्त)
फाल्गुन
पक्ष
शुक्ल पक्ष
विक्रम संवत्
2084
शक संवत्
1948
गुजराती संवत्
2082

नक्षत्र विस्तार

नक्षत्र पद
पद 4
कृत्तिका
नक्षत्र स्वामी
सूर्य
नक्षत्र देवता
अग्नि
सूर्य नक्षत्र
पूर्वभाद्रपद
पद 3स्वामी: बृहस्पति

ऋतु एवं अयन

वैदिक ऋतु
शिशिर
द्रिक ऋतु
वसन्त
अयन
उत्तरायण

दिनमान एवं रात्रिमान

दिनमान
12 घण्टे 01 मिनट 55 सेकण्ड
30 घटी 5 पल
रात्रिमान
11 घण्टे 58 मिनट 05 सेकण्ड
29 घटी 55 पल
मध्याह्न (सौर)
12:38
सूर्य का उच्चतम बिन्दु

दिन का चौघड़िया — 14 मार्च 2027, रविवार

अमृतशुभलाभचरकालउद्वेगरोग
06:3708:07
उद्वेग
नया काम प्रारंभ न करें
08:0709:37
चर
यात्रा, वाहन चालन
09:3711:08
लाभ
व्यापार, धन लेनदेन, नौकरी
11:0812:38
अमृत
सभी शुभ कार्य, पूजा, विवाह
12:3814:08
काल
महत्वपूर्ण निर्णय टालें
14:0815:38
शुभ
विवाह, गृह प्रवेश, मांगलिक कार्य
15:3817:09
रोग
स्वास्थ्य निर्णय टालें
17:0918:39
उद्वेग
नया काम प्रारंभ न करें

रात का चौघड़िया

18:3920:09
शुभ
विवाह, गृह प्रवेश, मांगलिक कार्य
20:0921:38
रोग
स्वास्थ्य निर्णय टालें
21:3823:08
उद्वेग
नया काम प्रारंभ न करें
23:0800:38
चर
यात्रा, वाहन चालन
00:3802:08
लाभ
व्यापार, धन लेनदेन, नौकरी
02:0803:37
अमृत
सभी शुभ कार्य, पूजा, विवाह
03:3705:07
काल
महत्वपूर्ण निर्णय टालें
05:0706:37
शुभ
विवाह, गृह प्रवेश, मांगलिक कार्य

धर्मस्थल पंचांग — मार्च 2027

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अन्य शहरों का पंचांग — 14 मार्च 2027, रविवार

दिल्लीमुंबईकोलकाताचेन्नईबेंगलुरुहैदराबादअहमदाबादपुणेजयपुरलखनऊवाराणसीप्रयागराज

धर्मस्थल पंचांग — 14 मार्च 2027, रविवार

धर्मस्थल (कर्नाटक) के लिए 14 मार्च 2027, रविवार का सम्पूर्ण हिन्दू पंचांग यहाँ प्रस्तुत है। पंचांग के पाँच अंग — तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार — के साथ-साथ सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय, राहु काल, यमगंड काल, गुलिक काल, ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित मुहूर्त और चौघड़िया की सटीक जानकारी दी गई है।

यह पंचांग धर्मस्थल के अक्षांश-देशांतर के अनुसार खगोलीय गणना पर आधारित है, जिससे सूर्योदय और अन्य समय स्थानीय रूप से सटीक हैं। किसी भी शुभ कार्य, पूजा, व्रत या मुहूर्त के लिए अपने शहर का पंचांग अवश्य देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धर्मस्थल में 14 मार्च 2027, रविवार को सूर्योदय कब है?

धर्मस्थल में 14 मार्च 2027, रविवार को सूर्योदय 06:37 बजे और सूर्यास्त 18:39 बजे है। ये समय खगोलीय गणना के आधार पर सटीक हैं।

धर्मस्थल में 14 मार्च 2027, रविवार को राहु काल कब है?

धर्मस्थल में 14 मार्च 2027, रविवार को राहु काल 17:09 से 18:39 तक है। इस समय नए कार्य प्रारंभ न करें।

धर्मस्थल में 14 मार्च 2027, रविवार को तिथि क्या है?

धर्मस्थल में 14 मार्च 2027, रविवार को शुक्ल षष्ठी तिथि है।

पंचांग के पाँच अंग कौन से हैं?

पंचांग के पाँच अंग हैं — तिथि (चंद्र दिन), नक्षत्र (चंद्र मंडल), योग (सूर्य-चंद्र संयोग), करण (अर्ध-तिथि) और वार (सप्ताह का दिन)। ये पाँचों मिलकर किसी भी दिन की शुभता निर्धारित करते हैं।

अभिजित मुहूर्त किसे कहते हैं?

अभिजित मुहूर्त दिन का सबसे शुभ समय है, जो सौर मध्याह्न (solar noon) के आसपास 48 मिनट का होता है। बृहत्संहिता के अनुसार यह दिन का आठवाँ मुहूर्त है।