ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

भैरव मंत्र

ॐ अक्षराय नमः

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपअविनाशी ब्रह्म
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

जिनका कभी क्षरण नहीं होता, जो ओंकार (अक्षर) स्वरूप हैं।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

स्थिरता

विस्तृत लाभ

स्थिरता

जप काल

नित्य

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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र

ॐ ह्रः ॐ सौं ॐ वैं ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीजयजय चण्डिकायै नमः। ॐ स्वीं स्वीं विध्वंसय विध्वंसय ॐ प्लूं प्लूं प्लावय प्लावय... (अति विस्तृत तांत्रिक शृंखला)... ॐ चामुण्डायै विच्चे स्वाहा। मम सकल मनोरथं देहि देहि, सर्वोपद्रवं निवारय निवारय... भञ्जय भञ्जय ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वाहा॥

सुरगुरुसुरवरपूजितलिङ्गं सुरवनपुष्पसदार्चितलिङ्गम्। परात्परं परमात्मकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥

ॐ अनन्तरूपिण्यै राधायै नमः

ॐ सरस्वत्यै स्वाहेति श्रोत्रं पातु निरन्तरम्। (स्वरूप: सरस्वती | लाभ: कानों, श्रवण-शक्ति व नाद-ग्रहण की रक्षा | अर्थ: सरस्वती मेरे कानों की निरंतर रक्षा करें) 8

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ज्येष्ठ लक्ष्मी स्वयम्भुवे ह्रीं ज्येष्ठायै नमः।

ॐ अश्वारूढाय विद्महे खड्गहस्ताय धीमहि तन्नो कल्किः प्रचोदयात्।