शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
षण्मुख कवचम्
अण्डमाय अवनी आहि अरीयोणप् पोरुळ ताहि
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारश्लोक 1
स्वरूपआदि कैलासनाथ
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो ब्रह्मांड और पृथ्वी रूप में व्याप्त हैं, वे कैलास के पुत्र मेरे माथे की रक्षा करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
मानसिक और शारीरिक रोगों से रक्षा
विस्तृत लाभ
मानसिक और शारीरिक रोगों से रक्षा।
जप काल
रोग या शत्रु भय के समय।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
मुनीन्द्रवृन्दवन्दिते त्रिलोकशोकहारिणि प्रसन्नवक्त्रपङ्कजे निकुञ्जभूविलासिनि। व्रजेन्द्रभानुनन्दिनि व्रजेन्द्रसूनुसङ्गते कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥ मुनीन्द्र-वन्दिते (ऋषियों द्वारा वंदित)
ॐ सर्वार्तिघ्न्यै नमः
ॐ निरुपद्रवाय नमः।
ॐ सतां-गतये नमः
ॐ श्रीमन्मन्दकटाक्षलब्धविभवब्रह्मेन्द्रगङ्गाधरां, त्वां त्रैलोक्यकुटुम्बिनीं सरसिजां वन्दे मुकुन्दप्रियाम्॥
विद्यार्थी लभते विद्यां, धनार्थी लभते धनम् । पुत्रार्थी लभते पुत्रान्, मोक्षार्थी लभते गतिम् ॥