शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
षण्मुख कवचम्
अण्डमाय अवनी आहि अरीयोणप् पोरुळ ताहि
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारश्लोक 1
स्वरूपआदि कैलासनाथ
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो ब्रह्मांड और पृथ्वी रूप में व्याप्त हैं, वे कैलास के पुत्र मेरे माथे की रक्षा करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
मानसिक और शारीरिक रोगों से रक्षा
विस्तृत लाभ
मानसिक और शारीरिक रोगों से रक्षा।
जप काल
रोग या शत्रु भय के समय।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
स्तुवन्ति ये स्तुतिभिरमीभिरन्वहं त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम्। गुणाधिका गुरुतरभाग्यभागिनो भवन्ति ते भुवि बुधभाविताशयाः॥
ॐ अनेकशिरसे नमः।
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये विज्ञानात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ नमो भगवते पंचवदनाय पूर्व कपि मुखे। सकल शत्रु संहारणाय स्वाहा॥
ॐ जगच्चक्राय स्वाहा – शिखायै वषट्
ॐ शोभायै नमः