भैरव मंत्र
ॐ गङ्गागीतागतिर्दात्र्यै नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो गंगा और गीता को भी गति देने वाली हैं।
इस मंत्र से क्या होगा?
ज्ञान (गीता) और पवित्रता (गंगा) की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
ज्ञान (गीता) और पवित्रता (गंगा) की प्राप्ति।
जप काल
तुलसी या कमलगट्टे की माला पर जप;
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ स्वधायै नमः
इडा देवहूर्मनुर्यज्ञनीर्बृहस्पतिरुक्थामदानि शंसिषद् विश्वेदेवाः सूक्तवाचः पृथिविमातर्मा मा हिंसीर्मधु मनिष्ये मधु जनिष्ये मधु वक्ष्यामि मधु वदिष्यामि मधुमतीं देवेभ्यो वाचमुद्यासँशुश्रूषेण्यां मनुष्येभ्यस्तं मा देवा अवन्तु शोभायै पितरोऽनुमदन्तु॥
ॐ नमस्ते गणपतये ॥ त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि ॥ त्वमेव केवलं कर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं धर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं हर्ताऽसि ॥ त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि ॥ त्वं साक्षादात्माऽसि नित्यम् ॥
ॐ रसज्ञाय नमः
ॐ विरजायै नमः
ॐ धनदाय नमः।