शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
ॐ गङ्गासुताय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपगंगापुत्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
माता गंगा के पुत्र (रखे गए) को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
विचारों की पवित्रता और पापों का प्रक्षालन
विस्तृत लाभ
विचारों की पवित्रता और पापों का प्रक्षालन।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ आं ह्रीं क्रों सहस्रार हुं फट् स्वाहा
सुवर्णमालिकाञ्चितत्रिरेखकम्बुकण्ठगे त्रिसूत्रमङ्गलीगुणत्रिरत्नदीप्तिदीधिते। सलोलनीलकुन्तलप्रसूनगुच्छगुम्फिते कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
ॐ अनेककण्ठाय नमः।
ॐ श्रीं क्लीं श्रीं नमः।
ॐ धर्माध्यक्षाय नमः
ॐ श्रीं ह्रीं ब्राह्म्यै स्वाहेति दन्तपङ्क्तीः सदाऽवतु। (स्वरूप: ब्राह्मी | लाभ: दाँतों और स्पष्ट वाचन-स्थान की रक्षा | अर्थ: ब्राह्मी देवी मेरी दंत-पंक्तियों की सदा रक्षा करें) 8