शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
सुवर्णमालिकाञ्चितत्रिरेखकम्बुकण्ठगे त्रिसूत्रमङ्गलीगुणत्रिरत्नदीप्तिदीधिते। सलोलनीलकुन्तलप्रसूनगुच्छगुम्फिते कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारकृपा-कटाक्ष/स्तोत्र मंत्र।
स्वरूपकम्बु-कण्ठगे (शंख समान कंठ वाली)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
शंख के समान तीन रेखाओं वाले कंठ में स्वर्ण माला धारण करने वाली, घुंघराले नीले केशों वाली राधे, मुझ पर कृपा करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
लाभ: वाक्-शुद्धि
विस्तृत लाभ
लाभ: वाक्-शुद्धि।
टिप्पणी
यहाँ इस सिद्ध स्तोत्र के सभी 19 श्लोकों को मंत्र रूप में, उनके अर्थ और लाभ सहित प्रस्तुत किया गया है। सभी का
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