भार्गव कवच (जिज्ञासा)
न श्रुतं कवचं देव न चोक्तं भवता मम। इति पृष्टः स गिरिशो मन्त्रयन्त्राङ्गतत्त्ववित्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
"हे देव! मैंने उनका कोई कवच नहीं सुना और न ही आपने मुझे बताया है।" ऐसा पूछे जाने पर मंत्र और यंत्र के तत्वों को पूर्णतः जानने वाले भगवान शिव ने कहा।
इस मंत्र से क्या होगा?
तंत्र-मंत्र और यन्त्र के अंगों का गूढ़ ज्ञान
विस्तृत लाभ
तंत्र-मंत्र और यन्त्र के अंगों का गूढ़ ज्ञान।
जप काल
नित्य कवच पाठ में।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ प्रभायै नमः
ॐ ह्रः ॐ सौं ॐ वैं ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीजयजय चण्डिकायै नमः। ॐ स्वीं स्वीं विध्वंसय विध्वंसय ॐ प्लूं प्लूं प्लावय प्लावय... (अति विस्तृत तांत्रिक शृंखला)... ॐ चामुण्डायै विच्चे स्वाहा। मम सकल मनोरथं देहि देहि, सर्वोपद्रवं निवारय निवारय... भञ्जय भञ्जय ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वाहा॥
श्रीं वाग्देवतायै स्वाहा भालं मे सर्वदाऽवतु। (स्वरूप: वाग्देवता | लाभ: मस्तक, आज्ञा चक्र व विचार-केंद्र की रक्षा | अर्थ: श्रीं बीज रूपी वाग्देवता मेरे ललाट की सदा रक्षा करें) 8
ॐ अनादिब्रह्मचारिणे नमः
ॐ पितृभक्ताय नमः
ॐ सत्यसन्धाय नमः