शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
सर्वव्यापक रुद्र स्तुति (एकादश अनुवाक)
सहस्राणि सहस्रशो ये रुद्रा अधि भूम्याम्। तेषां सहस्रयोजनेऽवधन्वानि तन्मसि॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारवैदिक रक्षा मंत्र
स्वरूपअनंत रुद्र गण
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
इस पृथ्वी पर जो हजारों-हजारों रुद्र (शिव के गण) विद्यमान हैं, हम प्रार्थना करते हैं कि उनके धनुषों की प्रत्यंचाएं हमसे हजारों योजन दूर रहें (वे हम पर क्रोधित न हों) 42।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अज्ञात भयों, गुप्त शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों से पूर्ण सुरक्षा
विस्तृत लाभ
अज्ञात भयों, गुप्त शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों से पूर्ण सुरक्षा 42।
जप काल
रुद्राभिषेक के अंतिम चरण में।
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