भैरव मंत्र
ॐ शरणागतवत्सलाय नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो अपनी शरण में आए हुए सबसे बड़े पापी पर भी कृपालु होते हैं, उन्हें नमस्कार है।
इस मंत्र से क्या होगा?
अहंकार त्याग कर भगवान के चरणों में पूर्ण शरणागति की अवस्था प्राप्त करना
विस्तृत लाभ
अहंकार त्याग कर भगवान के चरणों में पूर्ण शरणागति की अवस्था प्राप्त करना।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ अवलम्बायै नमः
ॐ षण्मुखाय नमः
ॐ ह्रीं श्रीं वीर लक्ष्म्यै नमः।
ॐ पद्मासने शब्दरूपे ऐं ह्रीं क्लीं वद वद वाग्वादिनी स्वाहा।
ॐ गोपीवल्लभाय विद्महे तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्।
ख्फ्रेँ ख्फ्रीँ चण्डे चण्डचामुण्डे ह्रीँ हूँ स्त्रीँ छ्रीँ विच्चे घोरे महामदोन्मनि क्लीँ ब्लूँ गुह्येश्वरि ॐ परानिर्वाणे ब्रह्मरूपिणि ॐ फ्रेँ फ्रेँ सिद्धिकरालि आप्यायिनि नवपञ्चचक्रनिलये घोराट्टराविणि कलासहस्रनिवासिनि खँ खँ खँ ह्सौँ फ्रेँ अवर्णेश्वरि प्रकृत्यपर शिवनिर्वाणदे ख्फ्रेँ स्वाहा॥