शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
ॐ श्रीकृष्णाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपसर्व-आकर्षक कृष्ण
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
सर्व-आकर्षक और आनन्द के स्रोत भगवान को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
एकाग्रता हेतु नित्य जप
विस्तृत लाभ
एकाग्रता हेतु नित्य जप
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
गाङ्गेयस्ताम्रचूडश्च ब्रह्मचारी शिखिध्वजः । तारकारिरुमापुत्रः क्रौञ्चारिश्च षडाननः ॥
ॐ महाभद्रायै नमः
ॐ जयवर्धनाय नमः
ॐ सृष्टिमयास्वरूपाय नमः।
श्री राधे शरणं मम
पाँचों त्रिशेम चलें, लांगुरिया सलार चलें। भीम की गदा चले, हनुमान की हाँक चले। नाहर की धाक चलै, नहीं चलै, तो हजरत सुलेमान के तखत की दुहाई है। एक लाख अस्सी हजार पीर व पैगम्बरों की दुहाई है। चलो मन्त्र, ईश्वर वाचा। गुरु का शब्द साँचा।