देवी सूक्त मंत्र - 4
मया सो अन्नमत्ति यो विपश्यति यः प्राणिति य ईं शृणोत्युक्तम्। अमन्तवो मां त उप क्षियन्ति श्रुधि श्रुत श्रद्धिवं ते वदामि॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो भी अन्न खाता है, देखता है, श्वास लेता है या सुनता है, वह मेरी ही शक्ति से ऐसा करता है। जो मुझे नहीं मानते वे नष्ट हो जाते हैं। हे श्रवण करने वाले! श्रद्धापूर्वक सुनो, मैं तुम्हें परम सत्य बता रही हूँ 1।
इस मंत्र से क्या होगा?
प्राण शक्ति (Vital energy) में वृद्धि और भौतिक सुख-सुविधा
विस्तृत लाभ
प्राण शक्ति (Vital energy) में वृद्धि और भौतिक सुख-सुविधा।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ विभीषणप्रियकराय नमः
ॐ महाकर्त्रे नमः
ॐ धर्माध्यक्षाय नमः
ॐ वातरोगहराय नमः
नितम्बबिम्बरुलम्बमानपुष्पमेखले प्रशस्तरलकिङ्किणीकलापमध्यमञ्जुले। करीन्द्रशुण्डदण्डिकாவरोहसौभगोरुके कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
ॐ ह्रीं क्लीं वाण्यै स्वाहेति मम पृष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: वाणी | लाभ: पीठ और मेरुदंड की रक्षा | अर्थ: वाणी मेरी पीठ की सदा रक्षा करें) 8