श्री राधा मंत्र
नितम्बबिम्बरुलम्बमानपुष्पमेखले प्रशस्तरलकिङ्किणीकलापमध्यमञ्जुले। करीन्द्रशुण्डदण्डिकாவरोहसौभगोरुके कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
पुष्पों की मेखला और बजती हुई रत्न किंकिणी धारण करने वाली, गजराज की सूंड के समान सुंदर जंघाओं वाली राधे, कृपा दृष्टि डालें।
इस मंत्र से क्या होगा?
लाभ: भौतिक आकर्षण से मुक्ति
विस्तृत लाभ
लाभ: भौतिक आकर्षण से मुक्ति।
टिप्पणी
यहाँ इस सिद्ध स्तोत्र के सभी 19 श्लोकों को मंत्र रूप में, उनके अर्थ और लाभ सहित प्रस्तुत किया गया है। सभी का
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
सर्वसुगन्धिसुलेपितलिङ्गं बुद्धिविवर्धनकारणलिङ्गम्। सिद्धसुरासुरवन्दितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥
आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्। लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम्॥
अक्षमालां कुठारं च रत्नपात्रं स्वदन्तकम् । धत्ते करैर्विघ्नराजो ढुण्ढिनाम मुदेऽस्तु नः ॥
ॐ चतुर्भुजात्तचक्रासिगदाशङ्खाद्यायुधाय नमः
ॐ कंसप्रध्वंसकारिणे नमः
ॐ पूतात्मने नमः